अग्रेजों को चकमा देकर इस कार से भागे थे नेताजी

वर्ष 1941 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस कोलकाता में अपने पैतृक आवास से अंग्रेजो की नजरबंदी से इसी कार का इस्तेमाल करते हुए भाग निकले थे। अब इस कार की मरम्मत की गई है। अब ये नई बना दी गई है, जर्मन वांडरर सेडान को ऑटोमोबाइल कंपनी ऑडी ने 1941 का रूप दिया है। अब यह शानदार तरीके से फर्राटा भरने की स्थिति में हैं। इस कार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बुधवार को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी और नेताजी के पोते एवं तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत बोस भी मौजूद थे।


राष्ट्रपति ने न केवल इसे रवाना किया, बल्कि वह कार में बैठे और कुछ दूरी तक का सफर भी किया।


नेताजी ने दक्षिण कोलकाता के एल्गिन रोड स्थित अपने आवास से निकल भागने के लिए इसी ‘ऑडी वांडरर डब्ल्यू 24’ कार का इस्तेमाल किया था। वह इस कार से बिहार के गोमो (अब झारखंड में) रेलवे स्टेशन तक पहुंचे थे।


नेताजी के नजरबंदी से भागने की घटना को "महानिष्क्रमण’ के रूप में जाना जाता है। और बुधवार को इसकी 76वीं वर्षगांठ थी।

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